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मर्डर के 36 साल बाद कोर्ट ने 2 और अभियुक्तों को सुनाई उम्रकैद की सजा, पढ़ें क्या है पूरा केस

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हाइलाइट्स

हत्या के इस केस में वर्ष 2015 में दो अभियुक्तों को पहले ही उम्रकैद की सजा हो चुकी है
पुलिस ने इस मामले में जांच के बाद 6 आरोपियों के खिलाफ कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की थी

चूरू. राजस्थान के चूरू शहर में वर्ष 1986 में हुई हत्या के मामले (Murder Case) में एडीजे कोर्ट ने 36 साल बाद 2 और आरोपियों को मंगलवार को उम्रकैद की सजा (Life sentence) सुनाई है. हत्या की यह वारदात सिनेमा हॉल की टिकट की बात को लेकर हुई रंजिश के कारण की गई थी. हत्या के इस मामले में दो अभियुक्तों को सात साल पहले 2015 में उम्र कैद की सजा सुनाई जा चुकी है. कोर्ट ने 14 गवाहों के बयान और दस्तावेजी साक्ष्य के आधार पर अपना फैसला सुनाया है.

अपर लोक अभियोजक एडीजे कोर्ट अनीश खान ने बताया की 9 सितंबर 1986 को चूरू में लीलगरों की मस्जिद के पास हत्या की इस वारदात को अंजाम दिया गया था. इस संबंध में कोतवाली थाने में 7 नामजद आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था. लीलगर मस्जिद के पास सफी खां की पीट पीटकर हत्या की गई थी. सिनेमा हॉल की टिकट की बात को लेकर हुये इस झगड़े में इब्राहिम, जाफर, निजामुद्दीन, हिदायत, हसन, नानू खान और प्रताप खान ने लाठियों से मारपीट की थी. इसमें अयूब खान, लाल खान और सफी खान गंभीर घायल हो गए थे.

इलाज के दौरान सफी खान की मौत हो गई थी
सफी खान के गंभीर चोटें लगी थी. सफी खान की 3 दिन बाद इलाज के दौरान राजकीय भरतिया जिला अस्पताल में मौत हो गई थी. अयूब खान के पर्चा बयान के आधार पर कोतवाली थाने में मुकदमा दर्ज हुआ था. इसमें पुलिस ने अपनी जांच के बाद इब्राहिम को छोड़कर 6 आरोपियों के खिलाफ कोर्ट में आरोप पत्र दाखिल किया. इस बीच साल 1989 में इब्राहिम की ओर से दाखिल करवाई गई निगरानी पत्रावली हाईकोर्ट जोधपुर गई. वहां पत्रावली गुम हो गई.

2015 में प्रताप खान और जाफर खान को हो चुकी है सजा
उसके बाद वर्ष 2007 में हाईकोर्ट के आदेश पर नए सिरे से पत्रावली फिर से तैयार की गई. 2008 में इस मामले की सुनवाई फिर से शुरू हुई. पत्रावली पर उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर साल 2015 में प्रताप खान और जाफर खान को एडीजे कोर्ट ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई. इस बीच मुख्य आरोपी हिदायत खान और नानू खान फरार होने की वजह से मामले की सुनवाई नहीं हो पाई.

वर्ष 2018 में दोनों आरोपी कोर्ट में पेश हुए
वर्ष 2018 में जब दोनों आरोपी कोर्ट में पेश हुए तो उसके बाद सुनवाई फिर शुरू हुई. मंगलवार को एडीजे अनिता टेलर ने इस मामले में अपना फैसला सुनाते हुए आरोपी हिदायत और नानू खान को आजीवन कारावास की सजा सुनाई. अभियोजन की तरफ से पैरवी एपीपी अनीश खान और पीड़ित की ओर से रोशन सिंह राठौड़ वह महेश प्रताप सिंह राठौड़ ने की.

Tags: Churu news, Crime News, Murder case, Rajasthan news

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