छत्तीसगढ़ बीजेपी में बदलाव; नए प्रदेश अध्यक्ष अरुण साव के सामने ये हैं चुनौतियां; पढ़ें खास रिपोर्ट

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रायपुर. छत्तीसगढ़ बीजेपी 2018 चुनाव में मिली करारी हार को भूलते हुए 2023 में फिर से कमल खिलाना चाहती है. मगर 2018 से लेकर अब तक हुए तमाम चुनावों में बीजेपी की सभी कोशिशें और रणनीति नाकाफी ही साबित हुए हैं. जिसका नतीजा यह रहा है कि लोकसभा चुनाप के बाद बीजेपी को चुनाव दर चुनाव शिकस्त ही झेलनी पड़ी. जिससे पार्टी कई गुटों में बंट गई और कई गुट घर बैठ गए तो कुछ ने सक्रियता कम कर दी. जिससे नाराज केंद्रीय संगठन ने पहले प्रदेश प्रभारी बदल कर दो-दो प्रभारी दिए.

फिर अजय जामवाल को क्षेत्रीय संगठन महामंत्री बनाकर बड़ी जिम्मेदारी दी. अजय जामवाल के पहले ही दौरे के बाद बीजेपी की तस्वीर बदल गई. बीजेपी ने आदिवासी अध्यक्ष विष्णुदेव साय को हटाकर बिलासपुर सांसद अरूण साव को अध्यक्ष बना दिया. ताकि प्रदेश में पचास फीसदी के करीब अघोषित ओबीसी जनसंख्या को एक संदेश दिया जा सके.

मगर बीजेपी ने ओबीसी को अधय्क्ष तो बनाया लेकिन 2018 चुनाव में आदिवासी क्षेत्र बस्तर और सरगुजा में सूपड़ा साफ होने के बाद भी आदिवासी अध्यक्ष को हटाने का साहस दिखाया. जिस पर कांग्रेस भी चुटकी ले रही है. कांग्रेस की ओर से खुद मुख्यमंत्री भूपेश बघेल कहते हैं कि कम से कम विश्व आदिवासी दिवस के दिन तो विष्णुदेव साय को नहीं हटाना था. एक दिन बाद हटा देते. वे यह भी कहते हैं कि अध्यक्ष चाहे कोई भी हो लड़ाई जमकर लड़ी जाएगी.

सिफर रहा भाजपा के प्रयोगों का नतीजा

2018 चुनाव के बाद बीजेपी ने कई प्रयोग किए. मगर हर प्रयोग का नतीजा सिफर ही रहा. जिसके बाद बीजेपी के भीतर बदलाव की बयार बहने लगी और अंतत: अध्यक्ष बदल दिया गया. अध्यक्ष बदलने के बाद अब बीजेपी के भीतर नेता प्रतिपक्ष, युवामोर्चा अध्यक्ष को बदलने की प्रमुखता से चर्चा चल रही है. साथ ही कई जिलों के अध्यक्ष और अन्य मोर्चा-संगठनों के भी अध्यक्ष को हटाने की चर्चा आम है.

जानकार मानते हैं कि बिना बदलाव इस टीम के साथ बीजेपी 2023 में कोई करिश्मा नहीं कर सकती. इसलिए आमुलचूल बदलाव की जरूरत है. इन तमाम चर्चाओं के बीच बीजेपी प्रवक्ता केदार गुप्ता कहते हैं कि सीएम के बयान से बीजेपी इत्तेफाक नहीं रखती और नए जोश के साथ उत्साह के साथ 2023 में सरकार बनाने में कामयाब होगी. केंद्रीय बीजेपी ने संघ के करीबी अरूण साव को प्रदेश अध्यक्ष बनाकर बीते 18-20 सालों से चले आ रहे रमन सिंह के काकश को तोड़ने की कोशिश तो की है, मगर पूरी संगठन रमन सिंह के छाए से कब बाहर नेकलेगी यह एक बड़ा सवाल बना हुआ है.

Tags: Chhattisgarh news, Raipur news

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