भरतपुर में कबाड़ बीनने वाले बच्चों के हाथ में डॉक्टर ने थमा दी कलम, अब जग रही शिक्षा की अलख

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ललितेश कुशवाहा/भरतपुर. राजस्थान के भरतपुर में रहने वाले डॉ. वीरेन्द्र अग्रवाल की चर्चा क्षेत्र में खूब हो रही है. डॉ अग्रवाल कबाड़ बीनने वाले बच्चों की बेहतर शिक्षा के लिए कवायद कर रहे हैं. डॉ.वीरेंद्र अग्रवाल ने बताया कि इस प्रोजेक्ट की शुरुआत 3 साल पहले 2019 में की गई. रणजीत नगर कॉलोनी के पास स्थित कच्ची बस्ती के बच्चे अपने मां बाप के साथ कबाड़ बिनने का काम करते थे. इन्हें इस हालत में देख शिक्षित करने का विचार मन में आया और शुरुआत कर दी. अब तक कुल 276 बच्चों को नि:शुल्क शिक्षा दे चुके हैं. वही वर्तमान में 86 बच्चे पढ़ रहे है. पहले बच्चों के हाथ में कबाड़ हुआ करता था आज कलम देख अच्छा लगता है.

सुबह 8 से शाम 6 बजे तक संचालित होती है कक्षाएं
डॉ वीरेंद्र अग्रवाल ने आगे बताया इन बच्चों की कक्षाएं सुबह 8 बजे से शाम 6 बजे तक संचालित होती है. इसी समय के दौरान इनको पढ़ाने के साथ साथ खेल ,योग आदि गतिविधियां करवाई जाती हैं. सभी शिक्षक अपने समयनुसार बच्चो को पढ़ाते हैं. भामाशाहों के सहयोग से पाठ्य सामग्री उपलब्ध करवाई जाती है. प्रतिदिन बच्चों के लिए सुबह शाम भोजन की व्यवस्था की जाती है. कुछ लोग यहां आकर अपना जन्मदिन मनाते हैं और बच्चों के लिए एक दिन का भोजन कराने के साथ ही कपड़े एवं पाठ्य सामग्री दान करते हैं.

तीन से 13 साल के बच्चों को किया गया है शामिल
डॉ. अग्रवाल ने बताया कि इस प्रोजेक्ट के तहत 3 से 13 साल के बच्चों को शामिल किया गया है. इनको प्रोजेक्ट के तहत नि:शुल्क शिक्षा दी जाती है. शिक्षित हुए बच्चों को भामाशाहों के सहयोग से निजी व सरकारी स्कूल में प्रवेश दिलवाया जाता है. डॉ वीरेंद्र अग्रवाल द्वारा चलाई जा रही इस पहल की बच्चों के परिजन जमकर तारीफ कर रहे हैं. डॉक्टर अग्रवाल ऐसे परिवारों के लिए एक मिशाल बन चुके हैं.

स्वास्थ मंदिर की आवश्यकता है
डॉ. अग्रवाल ने बताया कि बच्चों के लिए 60 टीशर्ट – पजामा, 100 के आस पास जर्सी, भोजन के लिए दाल, तेल, घी एवं संस्थान के लिए रोटी मेकर मशीन की आवश्यकता है, जो कोई व्यक्ति इस संस्थान के लिए दान करना चाहता है 9413917821 हेल्प लाइन नंबर पर संपर्क कर सकता है.

Tags: Bharatpur News, Rajasthan news

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