महाराणा प्रताप की माटी से बने गणपति विराजित, 11 दिन होगी मंगल आरती, जानें क्या है खास?

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मनमोहन सेजू/बाड़मेर. देश भर की तरह राजस्थान के सरहदी बाड़मेर जिले में भी 11 दिवसीय गणेश महोत्सव का आगाज बुधवार को हुआ. बाड़मेर जिला मुख्यालय पर सैकड़ों गणेश पंडाल सजे हैं, लेकिन शहर के राज वेस्ट कॉलोनी में नगीना डांगी, आंशू सिंह और संतोष प्रजापति ने अनूठी पहल को धरातल पर उतारा है. इन्होंने इको फ्रैंडली गणपति की प्रतिमाओं को अपने मंगल आरती के लिए चुना है और इन्होंने इसके लिए बाड़मेर से तकरीबन 350 किलोमीटर दूर वीर महाराणा प्रताप की कर्म भूमि उदयपुर की माटी को खास तौर से लाकर भगवान विघ्नहर्ता की प्रतिमाओं को तैयार किया है.

मूलतः उदयपुर की रहने वाली नगीना डांगी के पति प्रकाश डांगी राज वेस्ट पॉवर प्लांट में काम करते हैं. इन्होंने बाड़मेर में गणेश महोत्सव में गणपति स्थापना का मन बनाया और उसके लिए वह उदयपुर जाकर वहां की मिट्टी लेकर आईं और अपनी सखियों के साथ बैठकर अपने हाथ से गजानंद की मूर्ति को तैयार किया है. उदयपुर की काली मिट्टी के साथ गाय का गोबर और अन्य प्राकृतिक वस्तुओं का इस्तेमाल कर इन्होंने भगवान गणेश की मूर्ति को तैयार की हैं. नगीना डांगी बताती है कि प्लास्टर ऑफ पेरिस और अन्य चीजों से बनी मूर्तियां ना केवल पर्यावरण के लिए घातक होती है. बल्कि इससे कई और तरह के नुकसान भी होते हैं.

की जाएगी मंगल कामना
दस दिन तक इन खास मूर्तियों की ना केवल पूजा अर्चना होगी बल्कि भगवान गणेश से मंगल कामना भी की जाएगी. अंशू सिंह और संतोष प्रजापत बताती हैं कि गणेश विसर्जन के दिन उन्होंने भगवान गणेश की प्रतिमाओं की बेकद्री देखी और उसी से माटी के गणेश बनाने का मन हुआ और उसी की परिणीति यह रही कि खुद ने अपने हाथों से ना केवल इन प्रतिमाओं को बनाया है बल्कि इन्हे सजाया-संवारा भी है. बहरहाल एक तरफ जहां गणेश महोत्सव को लेकर देश भर में उत्साह और आस्था अपने परवान पर नजर आती है, लेकिन गणेश विसर्जन के बाद देश भर में तालाबों, नदियों और समंदर किनारों पर बेहद दुखद मंजर नजर आते हैं. उन सभी से परे बाड़मेर के राज वेस्ट कॉलोनी में नगीना डांगी, आंशू सिंह और संतोष प्रजापति के गणपति ना केवल मन भावन है. बल्कि पर्यावरण के रक्षक के तौर पर भी नजर आते हैं.

Tags: Barmer news, Rajasthan news

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