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जयपुर. राजस्थान में कोरोना काल के दो साल बाद आयोजित हुए छात्रसंघ चुनाव में एनएसयूआई को करारा झटका लगा है. राजस्थान यूनिवर्सिटी के छात्रसंघ चुनाव में एक बार फिर से निर्दलीय प्रत्याक्षी निर्मल चौधरी ने जीत हासिल की है. राजस्थान यूनिवर्सिटी में अब तक 38 अध्यक्ष रहे हैं जिनमें से 20 अध्यक्ष निर्दलीय चुनाव लड़कर बने हैं. निर्दलीय निर्मल चौधरी ने निहारिका जोरवाल को 1467 वोटों से हराकर जीत हासिल की.
निर्मल चौधरी को कुल 4043 वोट मिले तो निहारिका जोरवाल को 2576 वोट मिले. निर्मल चौधरी मूलत: नागौर जिले के रहने वाले हैं. अपनी शिक्षा राजस्थान यूनिवर्सिटी से पूरी कर रहे हैं. निर्मल चौधरी पूर्व पीसीसी चीफ और उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट और विधायक मुकेश भाकर को अपना आदर्श मानते हैं. जीत के बाद निर्मल चौधरी ने कहा कि वो अंतिम दम तक छात्रों के लिए लड़ाई लड़ेंगे और यूनिवर्सिटी में शिक्षा से स्तर को बेहतर करने की दिशा में काम करेंगे.
निर्मल की जीत के पांच कारण
1. छात्रों के बीच में रहकर मदद
निर्मल चौधरी ने छात्र संघ का चुनाव लड़ने का मन बहुत पहले बना लिया था. कोरोना काल के दौरान उन्होंने छात्रों के बीच रहकर उनकी काफी मदद की, जिसका फायदा उन्हें चुनाव में मिला. इसके अलावा, विश्वविद्यालय में प्रवेश प्रक्रिया के दौरान लगातार छात्रों की मदद की. उनकी लोकप्रियता तेजी से बढ़ी. उन्हें पूरी उम्मीद थी कि एनएसयूआई से टिकट मिल जाएगा लेकिन जब टिकट नहीं मिला तो बागी तेवर अपनाते हुए निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में मैदान में उतरे और जीत हासिल की.
2. छात्रों की समस्याओं को लेकर मुखर
निर्मल चौधरी विश्वविद्यालय के छात्रों की समस्याओं समस्याओं को लेकर मुखर रवैया अपनाते रहे हैं. इससे पूरी यूनिवर्सिटी में उनकी लोकप्रियता में तेजी से इजाफा हुआ. इसके अलावा, उन्होंने छात्रों से सीधा संपर्क बनाया. एडमिशन करवाने में भी निर्मल जुटे रहे.
3. छात्रों की सहानुभूति
चुनाव में नामांकन के दिन निर्मल चौधरी ने शक्ति-प्रदर्शन किया था. इस दौरान पुलिस ने लाठीचार्ज किया. निर्मल को गिरफ्तार भी किया गया लेकिन यही घटना टर्निंग प्वाइंट साबित हुई. वह छात्रों की सहानुभूति बटोरने में कामयाब हो गए. यूनिवर्सिटी में छात्रों के बीच यह संदेश देने में सफल रहे कि पुलिस छात्रशक्ति को दबाने का प्रयास कर रही है. लाठीचार्ज के दौरान निर्मल चौधरी की बहन सारा चौधरी भी घायल हुईं, लेकिन अगले ही दिन उन्होंने फिर से मोर्चा संभाल लिया.
4. सोशल मीडिया पर सक्रियता
निर्मल ने सोशल मीडिया का इस्तेमाल अपने पक्ष में माहौल बनाने में किया. वह सोशल मीडिया पर लगातार सक्रिय रहे और छात्रों से जुड़े. चुनाव प्रचार में भी डिजिटल कैंपेनिंग का पूरा ध्यान निर्मल चौधरी की टीम ने रखा. इस रणनीति के चलते युवा उनसे ज्यादा से ज्यादा संख्या में जुड़े. चुनाव नजदीक आते ही निर्मल ने अपने संघर्ष के दौर के सोशल मीडिया पर पोस्ट किए. उनका चेहरा युवाओं के बीच लोकप्रिय हो गया.
5. NSUI के मुकाबले सशक्त रणनीति
NSUI शुरू से ही चुनाव में अपने रंग में नजर नहीं आई. रितु बराला को जब एनएसयूआई से टिकट मिला तो निहारिका ने बगावत कर दी. नामांकन वापसी तक NSUI निहारिका को नहीं मना पाई. यहीं से निर्मल चौधरी की जीत की स्क्रिप्ट तैयार हुई. इस स्क्रिप्ट को और धार देने का काम उनकी टीम ने किया. नतीजतन उन्होंने बाजी मार ली.
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Tags: Jaipur news, Rajasthan news
FIRST PUBLISHED : August 27, 2022, 21:34 IST
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