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जयपुर. राजस्थान की गहलोत सरकार ने संत विजयदास की मौत की जांच के आदेश दिए हैं. मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने ट्वीट कर कहा कि संत विजय बाबा की मौत की क्या वजह रही जब राजस्थान सरकार ने सैद्धांतिक रूप से मांगें मान ली थी. उन्होंने कहा कि प्रमुख सचिव स्तर से जांच कराई जाएगी. गहलोत ने कहा कि संत विजयदास के परिवार को पांच लाख की आर्थिक सहायता राजस्थान सरकार देगी. सीएम गहलोत ने अपने ट्वीट में लिखा कि संत श्री विजय बाबा का निधन बेहद दुखद है. हमने उन्हें बचाने के हरसंभव प्रयास किए एवं उन्हें बेहतर चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध करवाईं. मैं ईश्वर से प्रार्थना करता हूं कि उन्हें अपने श्रीचरणों में स्थान दें. मुझे दुख है कि जब सरकार ने उनकी मांगों पर सैद्धांतिक सहमति दे दी थी तो उन्हें किन परिस्थितियों में यह दुर्भाग्यपूर्ण कदम उठाना पड़ा. इस घटना की जांच प्रमुख शासन सचिव स्तर के अधिकारी से करवाने का निर्णय लिया है. साथ ही, श्री विजय बाबा के परिजनों को 5 लाख रुपये की सहायता राशि मुख्यमंत्री सहायता कोष से दी जाएगी.
गौरतलब है कि राजस्थान के पसोपा गांव में संत विजयदास ने अवैध खनन के विरोध में खुद को आग लगा ली थी. संत विजयदास का शुक्रवार की रात को दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में निधन हो गया. उनके पार्थिव शरीर को मथुरा के बरसाना स्थित माताजी गोशाला में अंतिम दर्शनों के लिए रखा गया. विरक्त संत रमेश बाबा के पुष्प अर्पित करने के उपरांत पार्थव शरीर को मुखाग्नि माताजी गोशाला के सचिव सुनील बाबा ने दी. अंतिम यात्रा में संत महंत नेता भी शामिल हुए और सभी ने एक स्वर से सीबीआई जांच की बात कह दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की.
भरतपुर के आदिबद्री धाम और कनकांचल पर्वत क्षेत्र में अवैध खनन के विरोध में पसोपा में साधु-संतों के साथ अन्य ग्रामीण 551 दिन से धरना-प्रदर्शन कर रहे थे. 16 जनवरी 2021 से शुरू हुआ विरोध प्रदर्शन संत के आत्मदाह के बाद खत्म हुआ. खनन के विरोध में छह अप्रैल 2021 को साधु-संतों के एक प्रतिनिधिमंडल ने जयुपर में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत से मुलाकात की थी. 20 जुलाई को बड़ी संख्या में साधु-संत विरोध करने के लिए जुटे. इसी दौरान आंदोलन स्थल पर संत विजयदास (65 साल) ने आत्मदाह के लिए अपने आप को आग के हवाले कर दिया था.
पुलिस और अन्य लोगों ने उन्हें फौरन कंबल में लपेट दिया लेकिन तब तक वह 80 फीसदी जल चुके थे. उन्हें आरबीएम अस्पताल में भर्ती करवाया गया था. लेकिन उनकी हालत गंभीर होने पर उन्हें पहले जयपुर के एसएमएस अस्पताल, फिर दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में भर्ती करवाया गया. शुक्रवार देर रात उपचार के दौरान उनकी मौत हो गई. शनिवार को संत विजय राघव दास का पार्थिव शरीर कड़ी सुरक्षा घेरे में बरसाना के माता जी गोशाला लाया गया. कामा के विमल कुंड में स्नान के उपरांत बरसाना स्थित माताजी गोशाला में सुनील दास ने पार्थिव शरीर को मुखाग्नि दी गई.
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FIRST PUBLISHED : July 23, 2022, 23:39 IST
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