सूचना आयोग का ऐतिहासिक फैसला, आपराधिक मामलों में मेडिकल रिपोर्ट देने से इंकार नहीं कर सकते हैं अफसर

[ad_1]

हाइलाइट्स

संसद और विधानसभा में मेडिको लीगल और मेडिकल रिपोर्ट्स दी जा सकती है तो फिर आरटीआई में भी दी जानी चाहिए.
मेडिको लीगल रिपोर्ट रोगी के कहने की बजाय कानूनी आवश्यकता के लिए तैयार होती है. इसलिए यह रिपोर्ट व्यक्तिगत नहीं है.

भोपाल. मेडिकल रिपोर्ट और मेडिको लीगल रिपोर्ट्स भी अब सूचना के अधिकार (RTI, आरटीआई) कानून के दायरे में आएंगी. मध्य प्रदेश राज्य सूचना आयुक्त राहुल सिंह एक मामले में फैसला देते हुए यह आदेश दिया है.

राज्य सूचना आयुक्त सिंह ने कहा कि आमतौर पर किसी व्यक्ति विशेष की मेडिकल रिपोर्ट की जानकारी आरटीआई अधिनियम की धारा 8 (1) (J) के तहत व्यक्तिगत होने से उपलब्ध नहीं कराई जाती है. लेकिन केस अपराधिक है तो व्यक्तिगत जानकारी होने के आधार पर मेडिकल रिपोर्ट की जानकारी को नहीं रोकना चाहिए. सिंह ने साफ किया कि  “सामान्य चिकित्सा मामलों के विपरीत, मेडिको लीगल रिपोर्ट रोगी के कहने पर तैयार नहीं होती हैं,  इसकी कानूनी आवश्यकता होने के चलते इसे तैयार किया जाता है. वही पूर्व मैडिकल  रिकॉर्ड के आधार पर भी कई पर अपराध थानों में पंजीबद्ध किया जाता है. ऐसे में RTI में वास्तविक तथ्यों के सामने आने से न्यायिक व्यवस्था सुनिश्चित होती है तो जानकारी देना लोकहित में है.” लिहाजा, मेडिकल रिकॉर्ड की जानकारी आरटीआई अधिनियम की धारा 8 (1) (J) के तहत व्यक्तिगत मानकर देने से इनकार नहीं किया जा सकता है.
यह भी पढ़ें: घोटालों का मध्यप्रदेश: कुपोषित बच्चों का भोजन कंपनियां हजम कर गई, गड़बड़ियां ऐसी कि मोटरसाइकिल को बना दिया ट्रक 

यह है मामला
सिंह ने फैसला बालाघाट जिले के एक प्रकरण में सुनाया है. इस मामले में पति ने अपनी पत्नी की सोनोग्राफी रिपोर्ट मांगी थी. पत्नी ने पति के ऊपर दहेज प्रताड़ना के साथ-साथ मारपीट कर गर्भ में भ्रूण हत्या का आरोप लगाया था. पुलिस ने आरोपी पति को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था बाद में हाईकोर्ट ने पर्याप्त साक्ष्य ना होने के आधार पर पति को जमानत दे दी. जमानत पर छूटने के बाद पति ने आरटीआई आवेदन लगाकर सोनोग्राफी रिपोर्ट की जानकारी मांगी. पति का मानना है कि  सोनोग्राफी रिपोर्ट के सामने आने से मामले में दूध का दूध पानी का पानी हो जाएगा.
यह भी पढ़ें: ड्राफ्ट: गैंगस्टर कौन, यह तय करने में मध्यप्रदेश सरकार को छूटे पसीने, टाला कानून

सीएमएचओ ने जानकारी देने से मना किया
पति की आरटीआई पर लोक सूचना अधिकारी (मुख्य चिकित्सा अधिकारी) ने व्यक्तिगत जानकारी के आधार पर धारा 8(1)(J) के तहत जानकारी देने से इनकार कर दिया था. इस मामले की सुनवाई करते हुए सूचना आयुक्त सिंह ने कहा कि मुख्य चिकित्सा अधिकारी  ने धारा 8 (1) (J) के प्रावधान की अनदेखी की, जिसमें कहा गया है कि ऐसी जानकारी जो संसद या विधानसभा को देने से मना नहीं किया जा सकता है वह जानकारी किसी भी व्यक्ति को देने से मना नहीं किया जा सकता है. जब इस मामले पर   राज्य सूचना आयुक्त  सिंह ने  सुनवाई कर दौरान पुछा तो मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने स्वीकार किया कि वे राज्य विधानसभा या संसंद को जानकारी देने से इनकार नहीं कर सकते. सिंह ने अपने आदेश में यह कहा कि इस प्रकरण में व्यक्ति विशेष के व्यक्तिगत हित की तुलना में न्यायिक हित और लोकहित का पड़ला ज्यादा भारी दिख रहा है.

Tags: Bhopal News Updates, Madhya Pradesh government, Madhya pradesh news, Madhya Pradesh News Updates, MP news Bhopal, RTI

[ad_2]

Source link

Comments (0)
Add Comment