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IMTIYAZ ALI
झुंझुनूं. राजस्थान के झुंझुनूं जिले के खेतड़ी कस्बे में करीब 200 साल पुराने राणावतजी का मंदिर में जयपुर के गोविंद देव जी मंदिर की झलक देखने को मिलती है. मंदिर की वैसी ही डिजाइन है और वैसी ही स्थापत्य कला है. इतना ही नहीं मूर्तियां भी गोविंद देव जी मंदिर जैसी ही काले पाषाण पत्थर की बनी हुई हैं. यह मंदिर तत्कालीन राजा बख्तावरसिंह ने रानी के कहने पर बनाया था. जानकारी के अनुसार खेतड़ी के पांचवें राजा बख्तावर सिंह द्वारा 1826 से लेकर 1829 के बीच में रानी राणाव के कहने पर खेतड़ी में महलनुमा राणावत जी का मंदिर बनवाया था.
आस्था का केंद्र यह मंदिर अपनी स्थापत्य कला के कारण मनमोहक और आकर्षक होने से लोगों को लुभाता है. शिक्षाविद सुरेश पांडे और व्यापार मंडल उपाध्यक्ष सुधीर गुप्ता ने बताया कि यह मंदिर जयपुर स्थित प्रख्यात गोविंद देव मंदिर का ही प्रतिरूप है. जयपुर के गोविंद देव के मंदिर में स्थापित भगवान श्री कृष्ण और राधा की काले पाषाण पत्थर जैसी ही मूर्तियां यहां स्थापित है.
मंदिर में देखने को मिलती हैं दुर्लभ मूर्तियां
मंदिर की स्थापत्य कला और डिजाइन भी करीब-करीब एक जैसी ही है. इस मंदिर में लगी श्री कृष्ण भगवान की मूर्ति की आंखें मनमोहक होने से भक्तों को अपनी ओर आकर्षित करती हैं. इस मंदिर के बारे में कहा जाता है कि इसकी मूर्तियां दुर्लभ और चमत्कारी है. महलरूपी मंदिर में बड़ा तहखाना भी है, जिसे बंद कर दिया गया. इस मंदिर का निर्माण राजा बख्तावर सिंह ने रानी राणाव जी के कहने पर करवाया था.
रानी राणाव जी सलूंबर के राजा रावत सरदार सिंह की बेटी थी. इस मंदिर में घुड़साल, भजन कीर्तन करने के लिए बड़ा हाल, कुआं, बाग और एक बड़ा तहखाना भी बनाया गया था. तहखाना आज भी है, लेकिन उसके रास्ते को देवस्थान विभाग द्वारा बंद करवा दिया गया. रियासतों के विलय के बाद यह मंदिर भी देव स्थान विभाग के द्वारा संचालित किया जाता है. यह मंदिर महलनूमा और आकर्षक होने से पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र बना हुआ है. रास्ते से निकलने वाले भी अपने मोबाइल में इसे कैद करना नहीं भूलते.
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Tags: Jhunjhunu news, Rajasthan news
FIRST PUBLISHED : August 24, 2022, 16:30 IST
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