MP News: धधकते अंगारों पर चली आस्था, देश-विदेश से पहुंचे लाखों जायरीन, जानिए ‘चेहल्लुम’ की परंपरा

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रिपोर्ट- जयदीप गुर्जर

रतलाम/जावरा. हुसैन टेकरी शरीफ पर मनाए जा रहे 80वें चेहल्लुम में शुक्रवार रात मातम -ऐ- खंदक यानी चूल का मुख्य आयोजन हुआ. जिसमें शामिल होने देश- विदेश से लाखों जायरीन हुसैन टेकरी पहुंचे. जावरा के हुसैन टेकरी पर ऐसी मान्यता है कि चेहल्लुम में अंगारों पर गुजरने से बीमारी व भूत प्रेत की बाधा नष्ट होती हैं. इसी के चलते हजारों लोग अपनी समस्या दूर करने के लिए जलती चूल पर से निकले. करीब 140 साल पहले 1882 में स्थापित हुसैन टेकरी पर कोरोनाकाल के दौरान दो साल सार्वजनिक कार्यक्रम नहीं हुए. इस बार ज्यादा भीड़ होने के कारण पहली बार एक साथ 4 चूल जलाई गई.

शुरुआत में जब एक या दो चूल जलती थीं तब सबसे पहले निकलने वाले अलमदार जिन्हें दूल्हे कहते है, उनकी संख्या 21 थी. लेकिन चूल की संख्या बढ़ने से इस बार प्रत्येक चूल में 12-12 यानी कुल 48 दूल्हे निकले.

100 कैमरे और 1200 पुलिसकर्मी से निगरानी
पहली बार प्रशासन ने चूल से निकलने वाले श्रद्धालुओं की गिनती के लिए 20 शिक्षकों की ड्यूटी लगाई गई. इनके अनुसार रात 10 से 1 बजे तक 27992 लोग अंगारों के ऊपर नंगे पैर चले. देर रात तक ये सिलसिला जारी रहा. यहां कर्बला के रोजे की तरह धार्मिक मान्यता है, जहां लोगों को स्वास्थ लाभ मिलता है. इसलिए जावरा में देशभर से श्रद्धालु जियारत करने आते हैं. इसे हुसैनी मिशन आयोजन करता है. पुलिस और प्रशासन भी लाखों श्रद्धालुओं के आने से पहले व्यवस्थाओं में जुटा रहा.

पुलिस प्रशासन की कड़ी नजर
रतलाम के एसपी अभिषेक तिवारी ने जानकारी देते हुए बताया कि इस आयोजन के लिए 1200 से अधिक पुलिसकर्मियों और अधिकारियों को नियुक्त किया गया. चूल कार्यक्रम के आयोजन के लिए तीन एंट्री प्वाइंट बनाए गए. वहीं, 100 से अधिक सीसीटीवी कैमरा और 6 वॉच टॉवर से पूरे क्षेत्र पर नजर रखी गई. चूल के कार्यक्रम में देरी ना हो इसके लिए कार्यक्रम स्थल पर 4 चूल का निर्माण किया गया.

सबसे पहले निकलते हैं दूल्हे
इमाम हुसैन व उनके परिवार ने कर्बला में जो तकलीफे उठाई थी. उसी की याद में जायरीन यहां धधकते अंगारों से गुजरते हैं. सबसे पहले निकलने वालों को दूल्हा कहते हैं. इनके अलग कपडे़ व हाथों में पवित्र कुरान व अलम होता हैं. ये सबसे आगे होते है, इसलिए इन्हें दूल्हा या अलमदार कहा जाता हैं.

हुसैनी मिशन के मुकादम ने बताया कि इनके बाद ही जायरीनों का निकलना शुरू होता हैं. परंपरागत रूप से इन्हें दूल्हा कहते हैं व इन्हें सौभाग्यशाली माना जाता है.

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