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पिलानी Rajasthan का एकमात्र ऐसा शहर, जहां एक नहीं 2-2 नगरपालिकाएं, जानें इतिहास

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रिपोर्ट- इम्तियाज अली

झुंझुनूं. राजस्थान में पिलानी ही एकमात्र ऐसा शहर है, जहां एक नहीं बल्कि दो-दो नगरपालिकाएं हैं. दूसरी नगरपालिका का गठन 1959 में किया गया था, जबकि पहली 1944 से ही अस्तित्व में है. राज्य सरकार ने प्रसिद्ध बिट्स कैंपस को अलग शहर मानकर 1959 में दूसरी पालिका के गठन को मंजूरी दी थी. इसका नाम विद्या विहार नगरपालिका है. हालांकि शुरुआत में इसे मनोनयन पालिका का दर्जा था. इसका मकसद बिट्स कैंपस का डवलपमेंट और यहां रहने वाले स्टूडेंट्स व कर्मचारियों के लिए सुविधाएं का विस्तार करना था. असल में 4 ही वार्ड बनाए गए थे. 1974 में इन्हें बढ़ाकर 13 कर दिया गया. वर्तमान में यहां 25 वार्ड हैं.

1994 से यहां लगातार चुनाव हो रहे हैं और दूसरी पालिकाओं की तरह ही कार्य किया जा रहा है. पहले निर्वाचित चेयरमैन बीके सूद बने थे. वे बिरला एजुकेशन ट्रस्ट के डायरेक्टर थे. विद्या विहार पालिका के पहले ईओ रह चुके फूलसिंह का कहना है कि बिट्स मैनेजमेंट की मांग पर राज्य सरकार ने अलग से पालिका के गठन को मंजूरी दी थी.

1974 में बढ़ाकर 13 कर दिया गया. वर्तमान में यहां 25 वार्ड हैं.

1974 में बढ़ाकर 13 कर दिया गया. वर्तमान में यहां 25 वार्ड हैं.

क्योंकि मैनेजमेंट का कहना था कि अलग से निकाय हाेगा तो कैंपस में रहने वाले हजारों परिवारों को फायदा होगा. साथ ही लाेकल राजनीतिक हस्तक्षेप से कैंपस को दूर रखने के लिए इसका गठन कराया गया था.

चुनाव से पहले होता था पार्षदों का मनोनयन
शुरुआत में चेयरमैन व पार्षदों का मनोनयन कलेक्टर की सिफारिश पर राज्य सरकार की ओर से किया जाता था. इनमें नौ सदस्यों का मनोनयन किया जाता. इनमें एक महिला व एक सफाई कर्मचारी होना जरूरी था. वर्तमान में विद्या विहार पालिका क्षेत्र में करीब 17 हजार से अधिक लोग निवास करते हैं.

18 नवंबर 1960 में हुई थी पहली बैठक
विद्या विहार नगरपालिका में शुरुआत में नौ सदस्य मनोनीत किए गए. बोर्ड की पहली बैठक 18 नवंबर 1960 को हुई थी. 1974 में इन्हें बढ़ाकर 13 कर दिया गया. वर्तमान में यहां 25 वार्ड हैं. 1995 से यहां लगातार चुनाव हो रहे हैं और दूसरी पालिकाओं की तरह ही कार्य किया जा रहा है.

पहले होते थे नामित मंडल, फिर बनाई गईं नगरपालिकाएं
डॉ. कमल अग्रवाल ने बताया कि हालांकि आजादी से पहले प्रदेश में करीब 109 निकायों की स्थापना की जा चुकी थी और इनके नाम थे नामित मंडल. नामित मंडल में शहर के मौजिज व्यक्ति को अध्यक्ष मनोनीत किया जाता था और उनके साथ सात सदस्यों का सलाहकार मंडल होता था. जिसमें स्थानीय प्रशासनिक अधिकारी, थाने का दरोगा, चिकित्सक, स्कूल का संस्था प्रधान और अन्य मौजिज लोग. इनकी देखरेख तत्कालीन सरकार करती थी.

बाद में नामित मंडल का ही नाम बदलकर नगरपालिका, नगर परिषद और नगर निगम किया गया.

Tags: CM Ashok Gehlot, Jhunjhunu news, Municipal Corporation, Rajasthan news, Rajasthan Tourism Department

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