छत्तीसगढ़ी म पढ़व- अंधियारी रात के अतियाचार
जइसे सावन-भादो के घपटे अंधियारी रात मं जब मनखे भटक जथे, तीर मं खड़े मनखे नइ दीखय तइसने कस ये कलजुग घला खरागे हे, घपटगे हे चारो मुड़ा अंधियार, अजगर सही निगलत जात हे, सत, इमान, धरम, अहिंसा अउ परेम ल. ओकर मुंह मं फंसे मेचका असन छटपटावत हे,…