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मां की ट्रेन हादसे में हुई मौत, अब ‘मौसी’ बाघिन अपनी मृत बहन के शावकों की कर रही देखभाल

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हाइलाइट्स

संजय दुबरी टाइगर रिजर्व में में 19 शावक हैं
वर्ष 2018 की रिपोर्ट के समय यह संख्या छह थी

भोपाल. ‘टाइगर स्टेट’ मध्य प्रदेश के जंगल में एक बाघिन में मातृत्व का दुर्लभ गुण देखा गया है. ‘टी-28’ नामक बाघिन यहां न केवल अपने बल्कि अपनी मृत बहन ‘टी-18’ के तीन शावकों की भी देखभाल कर रही है. उन्हें जंगल में शिकार की ट्रेनिंग देकर ‘मौसी’ होने का फर्ज भी निभा रही है . ‘मौसी’ बाघिन टी-28 ने अपने शावकों के साथ-साथ अपनी बहन के शावकों की देखभाल करके मध्य प्रदेश के सीधी जिले के संजय दुबरी राष्ट्रीय उद्यान और बाघ अभयारण्य में सभी का ध्यान अपन ओर खींचा है. बाघिन टी-18 से जन्मे चार शावकों के लिए जन्म के बाद ही जीवन का सफर कठिन हो गया, जब उनकी मां की एक ट्रेन हादसे में मौत हो गई. मां की मौत के बाद एक शावक को जंगल के बाघ ने अपना शिकार बना लिया.
इसके बाद टी-18 के तीन बचे शावकों को उनकी मौसी ने अपना लिया और वह उन्हें जीवन जीने के लिए जंगल के तौर-तरीके सिखाने लगी.

संजय दुबरी बाघ अभयारण्य के क्षेत्र निदेशक वाईपी सिंह ने बताया, ‘हमें सूचना मिली थी कि इस साल 16 मार्च को दुबरी रेंज के रिजर्व कोर एरिया में रेलवे पटरी के पास एक बाघिन घायल पड़ी है. वन विभाग का दल मौके पर पहुंचा तो पाया कि यह बाघिन टी-18 थी. घायल टी-18 को उपचार के बाद पिंजरे से रिहा कर दिया गया, लेकिन कुछ ही घंटों बाद उसकी मौत हो गई.’

सिंह ने कहा, ‘इसके बाद हमारी सबसे बड़ी चिंता टी-18 के चार शावकों की सुरक्षा को लेकर थी, जो उस वक्त नौ महीने के थे. इन शावकों की निगरानी के लिए हाथियों पर चढ़कर गश्त करने वाले दलों को तैनात किया गया और शावकों को शिकार मुहैया कराया गया, लेकिन दुर्भाग्य से एक बाघ ने एक शावक को मार डाला.’

अधिकारी ने बताया कि इस घटना ने शेष बचे तीन शावकों के लिए चिंता और बढ़ा दी, क्योंकि जिस क्षेत्र में टी-18 के शावक रहते थे, उसी इलाके में बाघ टी-26 घूमता था. सिंह ने कहा कि बाघिन ‘टी-11’ यानी कमली ने पहली बार गर्भवती होने पर टी-18, टी-16 (बाघ) और टी-17 (बाघिन) को जन्म दिया था, जबकि उसने दूसरी बार गर्भवती होने पर बाघिनों टी-28 और टी-29 को जन्म दिया था. उन्होंने कहा कि टी-18 को पहली बार पिछले साल जून में उसके चार शावकों के साथ देखा गया था जबकि उसकी बहन टी-17 ने अक्टूबर 2021 के आसपास तीन शावकों को जन्म दिया था.

इसी तरह उसकी अन्य बहनों टी-28 और टी-29 ने भी अक्टूबर और इस साल जनवरी में क्रमश: तीन-तीन शावकों को जन्म दिया. इस प्रकार कमली के कुनबे की टी-18 सहित चार बाघिन ने आठ महीने की अवधि में 13 शावकों को जन्म दिया. सिंह ने कहा कि टी-18 की मौत और एक बाघ द्वारा उसके चार में से एक शावक को मार दिए जाने के बाद शेष बचे तीन शावकों को शुरू में बाघिन टी-17 और उसके छोटे शावकों के साथ देखा गया. इससे अभयारण्य प्रबंधन को राहत मिली, जो बिन मां के शावकों की लगातार निगरानी कर रहा था.

उन्होंने कहा, ‘लेकिन ये शावक अगले ही दिन टी-17 से अलग हो गए. करीब 10 दिन की निगरानी के बाद टी-18 के इन अनाथ शावकों को उनकी एक और मौसी टी-28 के साथ देखा गया.’

उन्होंने कहा कि हैरानी के बात यह थी कि टी-28 ने अपनी बहन के इन तीन अनाथ शावकों को न केवल अपनाया बल्कि उन्हें अपने ही शावकों के साथ शिकार करना भी सिखाया. सिंह ने कहा, ‘अब टी-18 के ये शावक अपनी मौसी टी-28 द्वारा ट्रेनिंग दिए जाने के बाद स्वतंत्र रूप से शिकार करने में सक्षम हैं और वे अपने अन्य भाई-बहनों के साथ अपना शिकार साझा करते हैं.’
2006 में राष्ट्रीय उद्यान को बाघ अभयारण्य घोषित किया गया टाइगर रिजर्व
उन्होंने बताया कि 2006 में राष्ट्रीय उद्यान को बाघ अभयारण्य घोषित किया गया और इसमें संजय राष्ट्रीय उद्यान एवं संजय दुबरी बाघ अभयारण्य शामिल है. सिंह ने बताया कि वर्तमान में संजय दुबरी बाघ अभयारण्य में 19 शावक (एक वर्ष के कम आयु के), छह (एक से दो वर्ष के बीच) और 17 वयस्क (दो वर्ष से अधिक)-आठ नर और नौ मादा बाघ हैं. वर्ष 2018 की बाघ अनुमान रिपोर्ट के समय यह संख्या छह थी. मध्य प्रदेश ने 2018 की गणना में देश का ‘टाइगर स्टेट’ होने का प्रतिष्ठित तमगा हासिल किया है. अखिल भारतीय बाघ अनुमान रिपोर्ट के अनुसार, मध्य प्रदेश में 526 बाघ हैं जोकि देश के किसी भी राज्य के मुकाबले सबसे अधिक हैं.

मध्य प्रदेश में कान्हा, बांधवगढ़, पेंच, सतपुड़ा, पन्ना और संजय दुबरी जैसे आधा दर्जन बाघ अभयारण्य हैं.राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए) की वेबसाइट के मुताबिक प्रदेश में इस साल अब तक (जुलाई अंत तक) 27 बाघों की मौत हो चुकी है.

Tags: Bhopal news, Madhya pradesh news, Sidhi News

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