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इंद्रदेव को मनाने में जुटी महिलाएं, घर-घर जाकर मांगी भिक्षा, मिलता है पानी, चावल चना, जानें यह अनोखी परंपरा

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बलरामपुर. छत्तीसगढ़ में बीते दिनों से कई क्षेत्रों में मानसून जमकर मेहरबान है. कई जिलों में झमाझम बारिश से जनजीवन अस्त-व्यस्त है. वहीं कुछ जिले अभी भी बारिश की राह देख रहे हैं. इतना ही नहीं यहां के लोगों ने इंद्रदेव को प्रसन्न करने वाली पुरानी परंपराएं भी शुरू कर दी हैं. छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले की महिलाओं ने बारिश की आश में अपनी पुरानी परंपरा को मानते हुए एक दिक का उपवास रखा. साथ ही महिलाओं ने घर-घर जाकर भिक्षा भी मांगी.

ग्रामीणों ने भी इंद्रदेव को खुश करने के लिए पानी, चावल और चने का दान दिया. बलरामपुर जिले के दोहना समेत 7 गांवों की महिलाओं ने एक साथ दिनभर का उपवास रखा है. यहां के लोगों का मानना है कि ऐसा करने से बारिश के देवता इंद्रदेव प्रसन्न होते हैं और क्षेत्र में जमकर पानी गिरता है. दरअसल बलरामपुर जिले में बारिश ना होने की वजह से खेतों में किसानों की फसलें बर्बाद हो रही हैं. कई जगहों पर आलम यह है कि क्षेत्र में दरारें पड़ चुकी हैं.

कई क्षेत्रों की फसलें नष्ट

कई क्षेत्रों की फसलें नष्ट हो चुकी हैं. इस वर्ष जिले में बारिश कम होने की वजह से जिले के किसान काफी परेशान हैं. इंद्रदेव को मनाने के लिए या किसान लगातार प्रयासरत हैं. ताकि इंद्रदेव प्रसन्न होकर क्षेत्र में अच्छी बारिश करें. क्षेत्र के किसान बारिश पर आश्रित रहते हैं. ग्रामीणों का कहना है कि खेती किसानी करने के लिए किसान साहूकारों से एवं बैंकों से मोटी रकम लोन लेकर खेती किसानी का काम करते हैं. अगर फसल अच्छी नहीं होती है तो किसान कर्ज के तले दब जाएंगे. ग्रामीणों की इंद्रदेव को मनाने की प्रक्रिया कितनी कारगर सिद्ध होती है यह तो समय ही बताएगा. जिले में इन दिनों पिछले साल की अपेक्षा 40 से 50% औसत वर्षा कम हुई है.

Tags: Balrampur news, Chhattisgarh news

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