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शहर को सुंदर बनाने उजाड़े गए गरीबों के आशियाने, बदले में जो मकान मिला वो भी पूरा नहीं बना, जानें मामला

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रायपुर. छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के नगर पालिक निगम ने खम्हारडीह इलाके में तालाब के सौंदर्यीकरण के चलते पूरी बस्ती उजाड़ दी. देर रात तक लोगों के घर तोड़े गये. कुछ देर तक नेताओं ने हंगामा भी किया, लेकिन जब कार्रवाई नहीं रूकी तब वे भी अपने घर चले गये और आज इन्हे देखने वाला भी कोई नहीं है. यहां रहने वाली रामिन बघेल का कहना है शादी के बाद रायपुर की इसी बस्ती में वो पिछले 50 सालों से रह रही हैं.

रामिन ने बताया कि यहीं उनके बच्चे बड़े हुए उनकी शादी हुई और नाती-पोते भी यहीं खेलकर बड़े हुए हैं. नगर निगम वालों ने अचानक एक रात आकर पूरी बस्ती ही उजाड़ दी और निगम अधिकारियों ने केवल तोड़े गये मकानों के आधार पर ही बीएसयूपी के मकान अलॉट कर दिये है.  इधर बेघर होने के बाद भी इन गरीबों की मुश्किलें कम नहीं हुई है. जो बीएसयूपी का फ्लैट इन्हें दिया गया है वो अभी पूरी तरह से बना भी नहीं है. इसके चलते परेशानी हो रही है.

मकानों में जगह-जगह सीपेज
बीएसयूपी के मकानों में जगह-जगह सीपेज है और 10 से 15 सदस्यों वाले परिवार को भी एक कमरे और किचन वाला फ्लैट दिया गया है, जिसमें गुज़ारा करना काफी मुश्किल है. मामले को लेकर महापौर एजाज ढेबर का कहना है कि बस्ती तोड़ने से पहले निगम की टीम ने सर्वे किया था और सर्वे के आधार पर ही लोगों को मकान आवंटिंत किये गये हैं. बहरहाल भले ही महापौर की ये दलील हो कि सर्वे के बाद मकान दिया गया है, लेकिन आशियाना उजड़ने का दर्द झेल रहे इन लोगों के परिवार बड़े हैं. ऐसे में मुसीबत के समय इन गरीबों को मजबूरन किराये की जगह में शरण लेनी होगी. यहां सालों से रह रहे परिवार अब नए सिरे से अपनी जिंदगी शुरू करने को मजबूर हैं.

Tags: Chhattisgarh news, Raipur news

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