छत्तीसगढ़ी म पढ़व- हरियर छत्तीसगढ़ के तिहार हरेली
तब होही जब अषाढ़ में बांवत (जनम) हरेली बियासी (बिहाव) कोनो भी हालत म निपट जय. तभे तो हरहिन्छा हरेली के दिन गेड़ी खपा के रचरीच-रचरीच मचे जा सकत हे. नई बाजही ते थोकिन माटी तेल रिको दे. किसानी करे बर मांग के अनुसार पानी बरसे बर परही. काबर…